✨ Author Profile — Alok Ranjan Tripathi Vedic Astrologer • Vastu Expert • Spiritual Writer Alok Ranjan Tripathi is a distinguished Vedic Astrologer, Vastu Consultant, and Spiritual Writer with over 25 years of professional experience. Based in Indore, he has guided thousands of individuals through accurate horoscope interpretation, nakshatra-based predictions, Vastu correction
बुधवार, 31 दिसंबर 2025
नववर्ष का संकल्प हास्य व्यंग कहानी प्रेरक
सोमवार, 29 दिसंबर 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वर्ष 2026
आज 29 दिसंबर आज का मूलांक फल आइये जानते हैं।
रविवार, 28 दिसंबर 2025
आज 28 दिसंबर आज का मूलांक फल लिए जानते हैं।
शनिवार, 27 दिसंबर 2025
आज 27 दिसंबर 2025 मूलांक फल आइये जानते हैं।
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025
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आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ, इन्दौर
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कुंडली से जाने जेल जाने के योग ग्रहों की स्थिति
ज्योतिष में जेल जाने के योग किसी भी व्यक्ति की कुंडली में तभी बनते हैं जब ग्रह, भाव और दशा–अंतर्दशा कठोर परिणाम देने वाली स्थिति में हों। यह विषय संवेदनशील है, इसलिए इसे भविष्यवाणी की तरह नहीं बल्कि संभावना एवं ग्रहस्थिति के संकेत के रूप में समझना अधिक उचित है।
यहाँ कुंडली में कारावास/कानूनी बाधाएँ/जेल योग बनने के प्रमुख संकेत विस्तार से दिए जा रहे हैं—ज्योतिष में किसी भी समस्या समाधान के लिए एवं वास्तु विजिटक लिए संपर्क करें।
लेखक- आलोक रंजन त्रिपाठी ज्योतिष एवं वास्तविक एक्सपर्ट इंदौर
संपर्क सूत्र 8319482309
🔹 कौन-से भाव जेल या कारावास से संबंधित हैं?
| भाव | अर्थ/संकेत |
|---|---|
| 6वाँ भाव | शत्रु, मुकदमा, झगड़ा, कर्ज, कानूनी मामले |
| 8वाँ भाव | अपमान, दुर्घटना, गुप्त संकट, अचानक कष्ट |
| 12वाँ भाव | कारावास, विदेश, अस्पताल, बंधन |
यदि इन भावों पर पापग्रहों का प्रभाव बढ़ जाए तो बंधन, अदालत या जेल के योग अधिक सक्रिय हो जाते हैं।
🔥 ग्रहों की स्थिति जो जेल योग बना सकती है
- राहु/शनि का 6, 8 या 12 भाव में होना या दृष्टि होना
- मंगल क्रूर पाप स्थिति में हो और चंद्रमा के साथ मानसिक उग्रता बढ़ाए
- बुध कमजोर हो तो क़ानूनी निर्णयों में भूल, गलत काग़ज़ी कार्यवाही, धोखे के मामले
- चंद्र पीड़ित होने पर भावनाओं में बहकर गलती/कानूनी विवाद
- गुरु भी पीड़ा में हो तो संरक्षण कमजोर हो जाता है
🔍 विशेष योग जो ज्योतिष में जेल/कानूनी बाधाओं का संकेत देते हैं
- राहु + मंगल 6/8/12 भाव में → उग्रता, हिंसक प्रवृत्ति, विवाद
- शनि + मंगल → कोर्ट केस, लेन-देन में फँसाव
- राहु चंद्र युति (ग्रहन योग) → मानसिक भ्रम में गलत निर्णय
- शनि का लग्न या चंद्र पर कठोर प्रभाव → दंड योग
- 12वें भाव का स्वामी 8वें या 6वें में → बंधन का योग
- 6ठे भाव का स्वामी 12वें में → मुकदमेबाज़ी से हानि संभव
इन योगों में दशा–अंतर्दशा सक्रिय हो तो ही परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
🧭 कब फल सक्रिय होते हैं?
👉 यदि शनि, राहु, मंगल, केतु की दशा/अंतर्दशा चले और
👉 वे 6, 8, 12 भाव से जुड़ें
👉 साथ ही गुरु या शुभ ग्रह बचाव न करें
तब जीवन में कानूनी मामले या बंधन जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
⚠ महत्वपूर्ण
हर ऐसे योग का मतलब जेल जाना नहीं होता। कई बार यह संकेत केवल जुर्माना, विवाद, कोर्ट केस, यात्रा में रोक, सरकारी परेशानी, अस्पताल में रहना, विदेश में वीज़ा समस्या, जैसे रूपों में प्रकट होता है।
अच्छी दशा या शुभ दृष्टि हो तो संकट टल सकता है।
🕉 उपाय (यदि कुंडली में ऐसे योग हों)
- शनिवार को तिल का तेल दीपक शनि भगवान को अर्पित करें
- हनुमान चालीसा 21 दिन नियमित
- क़ानूनी मामलों में झूठ से बचें, धैर्य रखें
- काला कुत्ता, काली गाय को भोजन
- राहु शांतिपाठ, चंद्र–शनि के उपाय लाभकारी
✨ निष्कर्ष
ज्योतिष में जेल योग पूरी तरह “भविष्य तय” नहीं करते।
यह केवल संभावनाएँ बताते हैं — कि कब व्यक्ति का धैर्य, निर्णय, और कर्म परिक्षित हो सकते हैं।
सही कर्म, संयम, और उपाय के साथ ऐसे योग कमज़ोर पड़ सकते हैं, और जीवन सामान्य या सकारात्मक दिशा में भी मुड़ सकता है।
गुरुवार, 25 दिसंबर 2025
नवंबर महीने में जन्म लेने वाले जातक गुण स्वभाव कैरियर और सामाजिक जीवन
बुधवार, 24 दिसंबर 2025
मूलांक एक और वर्ष 2026 आपके लिए कैसा रहेगा
🔆 मूलांक 1 और वर्ष 2026
नेतृत्व, आत्मबल और नई शुरुआत का वर्ष
✍️ लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी
(ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ | क्रिएटिव राइटर)
🔢 मूलांक निकालने का तरीका
किसी भी व्यक्ति की जन्म तारीख के अंकों को जोड़कर एक अंक में बदल दिया जाए, वही उसका मूलांक होता है।
उदाहरण:
- 1, 10, 19, 28 तारीख को जन्मे लोग → मूलांक 1
(1+0=1, 1+9=10 → 1+0=1, 2+8=10 → 1+0=1)
☀️ मूलांक 1 का ग्रह स्वामी
सूर्य (Sun)
सूर्य आत्मा, नेतृत्व, आत्मविश्वास, सत्ता, प्रतिष्ठा और प्रकाश का कारक ग्रह है।
इसी कारण मूलांक 1 वाले लोग जन्मजात लीडर, आत्मनिर्भर और स्पष्ट सोच वाले होते हैं।
🌟 वर्ष 2026 का अंक प्रभाव
2026 = 2 + 0 + 2 + 6 = 10 → 1
👉 यानी वर्ष 2026 स्वयं मूलांक 1 का वर्ष है।
यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
निष्कर्ष:
👉 वर्ष 2026 मूलांक 1 वालों के लिए
जीवन बदलने वाला, पहचान दिलाने वाला और नई दिशा देने वाला वर्ष सिद्ध हो सकता है।
💼 करियर और कार्यक्षेत्र (2026)
- नेतृत्व की भूमिका मिलने के प्रबल योग
- सरकारी, प्रशासनिक, राजनीति, मैनेजमेंट, बिज़नेस, मीडिया, ज्योतिष, मोटिवेशनल स्पीकिंग में उन्नति
- स्वयं का कार्य शुरू करने वालों के लिए वर्ष अत्यंत शुभ
- जनवरी से अप्रैल: योजना निर्माण
- मई से अगस्त: संघर्ष और निर्णय
- सितंबर से दिसंबर: सफलता और पहचान
👉 बॉस, अधिकारी, समाज में प्रभाव बढ़ेगा
💰 आर्थिक स्थिति
- आय के नए स्रोत बनेंगे
- पुराना रुका धन वापस मिलने की संभावना
- निवेश में समझदारी आवश्यक (अहंकार से बचें)
- संपत्ति, वाहन या ऑफिस से जुड़ा निर्णय संभव
सलाह:
अपने नाम और प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दें, शॉर्टकट से बचें।
❤️ प्रेम और वैवाहिक जीवन
- अहंकार और अधिकार भावना रिश्तों में टकराव ला सकती है
- जीवनसाथी को बराबरी का सम्मान देना आवश्यक
- अविवाहितों के लिए प्रभावशाली, प्रतिष्ठित जीवनसाथी का योग
👉 प्रेम में सफलता तब मिलेगी जब “मैं” से ऊपर “हम” आएगा
🧠 मानसिक स्थिति और व्यक्तित्व
- आत्मविश्वास अत्यधिक बढ़ेगा
- निर्णय क्षमता तेज होगी
- कभी-कभी गुस्सा और अधीरता बढ़ सकती है
आध्यात्मिक संदेश:
सूर्य बाहर ही नहीं, भीतर भी चमकता है —
अहंकार नहीं, आत्मबल बनिए।
🕉️ शुभ संकेत (2026)
- शुभ रंग: लाल, केसरिया, सुनहरा
- शुभ दिन: रविवार
- शुभ अंक: 1, 10, 19
- शुभ दिशा: पूर्व
सरल उपाय
- प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करें
- “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जाप
- पिता और गुरु का सम्मान करें
✨ अंतिम निष्कर्ष
वर्ष 2026 मूलांक 1 वालों के लिए आत्म-सिद्धि, नेतृत्व और पहचान का वर्ष है।
यदि अहंकार पर नियंत्रण रखा गया, तो यह वर्ष
👉 राजयोग समान फल देने वाला सिद्ध होगा।
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✍️ आलोक रंजन त्रिपाठी
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नरेंद्र मोदी और भारतीय राजनीति
नरेंद्र मोदी और भारतीय राजनीति
(एक युग, एक विचार और एक प्रभाव)
✍️ लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु एक्सपर्ट | क्रिएटिव राइटर
भूमिका
भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल व्यक्ति नहीं रहते, बल्कि एक युग का प्रतिनिधित्व करने लगते हैं।
इक्कीसवीं सदी के भारत में ऐसा ही एक नाम है— नरेंद्र मोदी।
वे केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं हैं,
बल्कि राजनीति की भाषा, शैली, रणनीति और जन-संवाद को बदलने वाले नेता हैं।
उनके समर्थक उन्हें “नए भारत का शिल्पकार” मानते हैं,
तो आलोचक उन्हें “अत्यधिक शक्तिशाली नेतृत्व” का प्रतीक।
पर इन दोनों मतों के बीच एक सच्चाई निर्विवाद है—
नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति को स्थायी रूप से बदल दिया है।
साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण यात्रा
नरेंद्र मोदी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ।
चाय बेचने वाले पिता, सीमित संसाधन और ग्रामीण परिवेश—
यह पृष्ठभूमि भारतीय राजनीति में एक नई कथा लेकर आई।
उनकी यात्रा यह साबित करती है कि
भारतीय लोकतंत्र में अब भी
संघर्ष से सत्ता तक का मार्ग संभव है।
यही कारण है कि वे देश के बड़े वर्ग—
विशेषकर मध्यम और निम्न वर्ग—
के लिए आशा का प्रतीक बनते हैं।
राजनीति में नई भाषा और शैली
नरेंद्र मोदी से पहले
भारतीय राजनीति अपेक्षाकृत
औपचारिक, अभिजात और दूरी बनाए रखने वाली थी।
मोदी ने इसे बदला।
- रेडियो पर “मन की बात”
- सोशल मीडिया पर सीधा संवाद
- भाषणों में सरल शब्द, लोक-उदाहरण
- भावनात्मक अपील और राष्ट्रवाद का स्पष्ट प्रयोग
उन्होंने नेता और जनता के बीच
सीधा संबंध स्थापित किया।
आज भारतीय राजनीति में
संवाद केवल संसद में नहीं,
मोबाइल स्क्रीन पर भी होता है—
और यह परिवर्तन मोदी युग की पहचान है।
निर्णय लेने की राजनीति
नरेंद्र मोदी की राजनीति का सबसे प्रमुख तत्व है—
निर्णायक नेतृत्व (Decisive Leadership)।
- नोटबंदी
- जीएसटी
- अनुच्छेद 370 का हटना
- तीन तलाक़ कानून
- नई शिक्षा नीति
इन फैसलों से सहमति-असहमति हो सकती है,
पर यह स्वीकार करना होगा कि
मोदी सरकार निर्णय टालने की राजनीति नहीं करती।
इससे भारतीय राजनीति में
एक नई अपेक्षा जन्मी—
कि सरकार स्पष्ट निर्णय ले।
राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राजनीति
मोदी युग में
राष्ट्रवाद केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रहा।
यह संस्कृति, इतिहास और पहचान से भी जुड़ गया।
- अयोध्या राम मंदिर
- काशी विश्वनाथ कॉरिडोर
- उज्जैन महाकाल लोक
- योग और आयुष का वैश्विक प्रचार
इन प्रयासों ने
भारतीय राजनीति में
सांस्कृतिक पुनर्जागरण की बहस को केंद्र में ला दिया।
समर्थकों के लिए यह
“सांस्कृतिक आत्मसम्मान” है,
तो आलोचकों के लिए
“धार्मिक राजनीति”।
पर यह बहस स्वयं सिद्ध करती है
कि मोदी राजनीति केवल सत्ता नहीं,
विचारधारा भी है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में
भारत की वैश्विक छवि में भी परिवर्तन आया।
- G20 की अध्यक्षता
- अमेरिका, यूरोप, जापान से मजबूत रिश्ते
- प्रवासी भारतीयों से सीधा संवाद
- भारत को “विश्वगुरु” की अवधारणा से जोड़ना
पहली बार भारतीय राजनीति ने
आत्मविश्वास के साथ कहा—
“भारत सुनने वाला नहीं, नेतृत्व करने वाला देश है।”
आलोचनाएँ और प्रश्न
कोई भी लोकतंत्र
बिना आलोचना के जीवित नहीं रह सकता।
मोदी सरकार पर भी प्रश्न उठे—
- विपक्ष की भूमिका कमजोर होना
- मीडिया की स्वतंत्रता
- संस्थाओं की स्वायत्तता
- असहमति के प्रति कठोर रवैया
ये प्रश्न गंभीर हैं
और लोकतंत्र के लिए आवश्यक भी।
यह कहना अनुचित होगा कि
मोदी राजनीति केवल प्रशंसा योग्य है।
पर यह भी उतना ही सत्य है कि
उन्होंने राजनीति को
जनकेंद्रित और परिणामोन्मुख बनाया।
भारतीय राजनीति पर स्थायी प्रभाव
नरेंद्र मोदी के बाद
भारतीय राजनीति पहले जैसी नहीं रह सकती।
अब—
- नेता को संवाद करना होगा
- सरकार को निर्णय लेने होंगे
- विपक्ष को वैकल्पिक नेतृत्व गढ़ना होगा
- राजनीति को केवल वंशवाद से नहीं चलाया जा सकेगा
मोदी ने
राजनीति की शर्तें बदल दी हैं।
निष्कर्ष
नरेंद्र मोदी
भारतीय राजनीति का केवल एक अध्याय नहीं,
एक पूरा युग हैं।
वे न तो पूर्णतः देवता हैं,
न पूर्णतः खलनायक।
वे एक ऐसे नेता हैं
जिन्होंने राजनीति को
जन-आकांक्षाओं से जोड़ा।
इतिहास उनका मूल्यांकन करेगा—
पर वर्तमान यह मानने को बाध्य है कि
नरेंद्र मोदी के बिना
आधुनिक भारतीय राजनीति की कल्पना अधूरी है।
समापन पंक्ति
“राजनीति जब विचार बन जाए,
तो नेता केवल शासक नहीं,
कालखंड का प्रतिनिधि बन जाता है—
नरेंद्र मोदी उसी परिवर्तन का नाम हैं।”
सोमवार, 22 दिसंबर 2025
मूलांक 2,5 और 6 परफेक्ट पार्टनर क्यों माने जाते हैं आईए जानते हैं।
🌸 मूलांक 2, 5 और 6 — परफेक्ट पार्टनर क्यों माने जाते हैं?
(अंक ज्योतिष का गहन प्रेम-विश्लेषण)
✍️ लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ | क्रिएटिव राइटर
📍 इंदौर, मध्य प्रदेश
🔢 सबसे पहले जानिए — मूलांक कैसे निकालें?
अंक ज्योतिष में मूलांक जन्म तिथि से निकाला जाता है।
👉 जन्म की तारीख के अंकों को जोड़ दें
उदाहरण:
- 14 तारीख → 1 + 4 = 5 (मूलांक 5)
- 24 तारीख → 2 + 4 = 6 (मूलांक 6)
मूलांक 1 से 9 तक होते हैं और हर मूलांक व्यक्ति के स्वभाव, प्रेम, विवाह और रिश्तों पर गहरा प्रभाव डालता है।
❤️ मूलांक 2 — प्रेम में समर्पण और भावनाओं की गहराई
ग्रह: चंद्रमा 🌙
मूलांक 2 के जातक, विशेषकर महिलाएँ,
👉 प्यार को जीवन का केंद्र मानती हैं।
✨ प्रमुख गुण:
- अत्यंत संवेदनशील
- पार्टनर की भावनाओं को बिना कहे समझने वाले
- रिश्तों में समर्पण की भावना
- त्याग और सहनशीलता
💞 पार्टनर के लिए क्यों परफेक्ट?
- ये अपने साथी की छोटी-छोटी जरूरतों का भी ध्यान रखते हैं
- प्रेम में धोखा देना इनके स्वभाव में नहीं
- भावनात्मक सुरक्षा देने में माहिर
📌 नकारात्मक पक्ष:
अत्यधिक भावुकता के कारण कभी-कभी स्वयं को भूल जाते हैं।
💬 मूलांक 5 — समझदार, संवाद कुशल और रोमांटिक
ग्रह: बुध ☿
मूलांक 5 के लोग रिश्तों में दोस्ती + प्रेम का अद्भुत संतुलन बनाते हैं।
✨ प्रमुख गुण:
- बेहतरीन कम्युनिकेशन स्किल
- रोमांटिक और स्मार्ट
- बदलाव को सहजता से स्वीकार करने वाले
- पार्टनर को बोर न होने देने वाले
💞 पार्टनर के लिए क्यों परफेक्ट?
- हर रिश्ते में ताजगी बनाए रखते हैं
- प्रेम के साथ सम्मान भी देते हैं
- जीवनसाथी के करियर और सपनों में सहयोग
📌 नकारात्मक पक्ष:
कभी-कभी निर्णय लेने में अस्थिरता।
🌹 मूलांक 6 — सच्चा प्रेम, आकर्षण और जीवनसाथी धर्म
ग्रह: शुक्र ♀
मूलांक 6 को अंक ज्योतिष में प्रेम और वैवाहिक सुख का राजा कहा गया है।
✨ प्रमुख गुण:
- अत्यंत आकर्षक व्यक्तित्व
- रिश्तों में स्थायित्व
- परिवार और पार्टनर को प्राथमिकता
- प्रेम में वफादारी
💞 पार्टनर के लिए क्यों परफेक्ट?
- जीवनसाथी को रानी/राजा की तरह रखते हैं
- भावनात्मक और भौतिक दोनों सुख देते हैं
- शादी और रिश्तों को निभाने की अद्भुत क्षमता
📌 नकारात्मक पक्ष:
कभी-कभी अपेक्षाएँ अधिक हो जाती हैं।
🔮 निष्कर्ष (Experience से लिखा हुआ)
मेरे वर्षों के अनुभव में मैंने देखा है कि
👉 मूलांक 2, 5 और 6 वाले लोग
प्रेम, विवाह और पार्टनरशिप में सबसे अधिक संतुलित, वफादार और समर्पित होते हैं।
अगर ये तीनों मूलांक आपस में जुड़ जाएँ,
तो रिश्ता भावना + समझ + प्रेम का पूर्ण संगम बन जाता है।
📌 विशेष सूचना
यह लेख सामान्य अंक ज्योतिष पर आधारित है।
व्यक्तिगत परिणाम जन्म कुंडली, भाग्यांक और नामांक के अनुसार बदल सकते हैं।
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👤 आलोक रंजन त्रिपाठी
🔮 ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
📍 इंदौर, मध्य प्रदेश
📱 मोबाइल: 8319482309
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गुरुवार, 18 दिसंबर 2025
अदृश्य संकेत सच्ची घटना पर आधारित कहानी
मंगलवार, 16 दिसंबर 2025
अपना नहीं जो उसको अपना बनाऊं क्यों
रविवार, 14 दिसंबर 2025
फ्रॉड करने वाले सिग्नेचर और उसकी पहचान
नीचे “फ्रॉड करने वाले सिग्नेचर” विषय पर एक पूर्ण, तथ्यात्मक और चेतावनी-प्रधान लेख दिया जा रहा है, जिसे आप अपने नाम से ब्लॉग, फेसबुक पोस्ट, इंस्टाग्राम कैप्शन या वीडियो स्क्रिप्ट के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
⚠️ फ्रॉड करने वाले सिग्नेचर: पहचान और चेतावनी
— आलोक रंजन त्रिपाठी, ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ, इन्दौर मो 8319482309
सिग्नेचर केवल नाम लिखने का तरीका नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के अवचेतन मन, नीयत और सोच की दिशा को दर्शाता है। सिग्नेचर एस्ट्रोलॉजी व ग्राफोलॉजी में कुछ विशेष प्रकार के हस्ताक्षर ऐसे माने गए हैं जो छल, धोखाधड़ी, झूठ, वचनभंग और गुप्त चालों की प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
यहाँ स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि हर ऐसा सिग्नेचर रखने वाला व्यक्ति अपराधी नहीं होता, परंतु ऐसे हस्ताक्षर चेतावनी संकेत अवश्य होते हैं।
🔻 फ्रॉड प्रवृत्ति वाले सिग्नेचर के प्रमुख प्रकार
1️⃣ नाम अधूरा लिखने वाला सिग्नेचर
जब व्यक्ति:
- पूरा नाम न लिखे
- केवल अक्षर या टेढ़े-मेढ़े संकेत बनाए
- पहचान छिपाने का प्रयास करे
तो यह राहु प्रभाव और गुप्त मानसिकता को दर्शाता है। ऐसे लोग अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करते हैं।
2️⃣ सिग्नेचर पर ओवरलाइन या काटने वाली लाइन
यदि हस्ताक्षर पर:
- ऊपर से लाइन खींच दी जाए
- नाम को काटते हुए स्ट्रोक हो
तो यह व्यक्ति के आक्रामक, चालाक और नियंत्रणकारी स्वभाव का संकेत है। यह फ्रॉड प्रवृत्ति का प्रमुख संकेत माना जाता है।
3️⃣ अत्यधिक सजावटी और उलझे हुए हस्ताक्षर
बहुत ज्यादा:
- घुमाव
- सजावट
- समझ में न आने वाला डिज़ाइन
यह दिखाता है कि व्यक्ति हकीकत से अधिक दिखावा करता है और बातों में उलझाकर भ्रम पैदा कर सकता है।
4️⃣ अक्षरों का जानबूझकर छिपाया जाना
जब:
- अक्षर पढ़े न जाएँ
- सिग्नेचर पहचान में न आए
तो यह संकेत देता है कि व्यक्ति साफ नीयत से काम नहीं करता और पीछे की रणनीति बनाता है।
5️⃣ नीचे की ओर तीखा काटने वाला अंतिम स्ट्रोक
यदि अंतिम स्ट्रोक:
- नीचे गिरता हुआ
- नुकीला या चाकू जैसा हो
तो यह बदले की भावना, लालच और धोखाधड़ी की ओर झुकाव दर्शाता है।
6️⃣ एक जैसा हस्ताक्षर हर बार न बनना
यदि व्यक्ति हर बार:
- अलग-अलग सिग्नेचर करे
- स्थिरता न हो
तो यह पहचान बदलने और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति का संकेत है— जो फ्रॉड में आम होता है।
7️⃣ सिग्नेचर में असामान्य स्पेसिंग
बहुत ज्यादा या बहुत कम दूरी:
- मानसिक असंतुलन
- व्यवहार में दोहरापन
- धन और संबंधों में धोखा
का संकेत देती है।
🛑 ऐसे सिग्नेचर वालों से सावधानी क्यों ज़रूरी है?
✔ कागज़ी काम में धोखा
✔ मौखिक वादों में फँसाना
✔ आर्थिक छल
✔ झूठे आश्वासन
✔ जिम्मेदारी से पलायन
🌟 ईमानदार व्यक्ति का सिग्नेचर कैसा होता है?
✔ पढ़ने योग्य
✔ संतुलित आकार
✔ न ऊपर काटने वाली लाइन
✔ न अत्यधिक सजावट
✔ स्थिर और एक-सा
✨ निष्कर्ष
सिग्नेचर किसी व्यक्ति की नीयत का दर्पण होता है। अगर हस्ताक्षर ही पहचान छिपा रहा हो, तो व्यवहार भी संदिग्ध हो सकता है। अतः किसी भी बड़े आर्थिक या कानूनी सौदे से पहले सिग्नेचर पर ध्यान देना बुद्धिमानी है।
📌 आप अपने या किसी सिग्नेचर की फोटो भेजकर निजी विश्लेषण भी करा सकते हैं।
🔮 ज्योतिष, हस्ताक्षर विश्लेषण एवं वास्तु परामर्श हेतु संपर्क करें
आलोक रंजन त्रिपाठी | इन्दौर
रोमांस प्रेम में सबसे आगे इस मूलांक के लोग होते हैं।
💖 मूलांक 4, 6 और 9 — रोमांस और प्यार में आगे क्यों रहते हैं?
लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी
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✨ भूमिका
मेरे वर्षों के ज्योतिषीय अनुभव में मैंने यह स्पष्ट रूप से महसूस किया है कि कुछ मूलांक ऐसे होते हैं जिनके जीवन में प्रेम, आकर्षण और रोमांस स्वाभाविक रूप से प्रबल रहता है।
विशेष रूप से मूलांक 4, 6 और 9 के जातक प्रेम संबंधों में आगे रहते हैं—चाहे वह भावनात्मक गहराई हो, समर्पण हो या आकर्षण।
आइए जानते हैं इन तीनों मूलांकों का प्यार और रोमांस से गहरा संबंध।
💕 मूलांक 6 — प्रेम और आकर्षण का सम्राट (शुक्र)
मूलांक 6 पर शुक्र ग्रह का शासन होता है, जो प्रेम, सौंदर्य, रोमांस और भौतिक सुखों का कारक है।
💖 प्रेम में गुण
- ये लोग पार्टनर के लिए लकी साबित होते हैं
- रिश्तों में मिठास, रोमांस और केयर भरपूर
- अपने प्रेम को जताना इन्हें आता है
- साथी को स्पेशल फील कराना इनकी आदत होती है
👉 ऐसे लोग प्रेम में दिल से देते हैं, बदले में सम्मान चाहते हैं।
🌹 मूलांक 9 — जुनून और समर्पण का प्रतीक (मंगल)
मूलांक 9 पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है, जो ऊर्जा, जुनून और बलिदान का प्रतीक है।
❤️ प्रेम में गुण
- प्यार में पूरी तरह समर्पित
- रोमांस में जोश और तीव्रता
- अपने पार्टनर के लिए लड़ जाना जानते हैं
- भावनात्मक रूप से गहरे लेकिन कभी-कभी आवेगी
👉 मूलांक 9 वाले लोग प्यार को मिशन की तरह निभाते हैं।
💫 मूलांक 4 — रहस्यमय आकर्षण और अलग सोच (राहु)
मूलांक 4 पर राहु का प्रभाव होता है—जो अलग सोच, रहस्य और अनोखे आकर्षण का कारक है।
💘 प्रेम में गुण
- सामान्य नहीं, अलग तरह का प्यार
- अपने पार्टनर को मानसिक रूप से आकर्षित करते हैं
- रोमांस में प्रयोग और नवीनता
- थोड़ा रहस्यमय स्वभाव, जो सामने वाले को खींचता है
👉 मूलांक 4 के लोग दिमागी और भावनात्मक दोनों स्तर पर प्रेम करते हैं।
🌟 निष्कर्ष (मेरे अनुभव से)
मेरे अनुभव में—
- मूलांक 6 प्रेम को संवारता है
- मूलांक 9 प्रेम को शक्ति देता है
- मूलांक 4 प्रेम को रहस्य और गहराई देता है
इसीलिए मूलांक 4, 6 और 9 वाले लोग
👉 रोमांस और प्यार के मामलों में अक्सर आगे देखे जाते हैं।
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✔ अपने मूलांक
✔ प्रेम जीवन
✔ विवाह योग
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आलोक रंजन त्रिपाठी
📞 8319482309
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आपकी कुंडली का दशम भाव और आपका कैरियर
आपका कैरियर और कुंडली का दशम भाव
— आलेख : आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ, इन्दौर
📞 संपर्क : 8319482309
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दशम भाव क्या है?
जन्म कुंडली में दशम भाव (10th House) को कर्म, प्रतिष्ठा, पद और करियर का प्रमुख स्थान माना जाता है।
इसी भाव से पता चलता है कि व्यक्ति किस पेशे में आगे बढ़ेगा, समाज उसे किस रूप में पहचानेगा और उसकी जीवन-दिशा कैसी बनेगी।
दशम भाव केवल नौकरी या व्यापार नहीं बताता, बल्कि यह पूरी कर्म यात्रा और जीवन की उपलब्धियों का आधार है।
1. दशम भाव आपकी करियर दिशा कैसे तय करता है?
✔ करियर का मार्ग
कौन सा पेशा आपको स्थिरता और सफलता देगा।
✔ सामाजिक पहचान
समाज में आपका प्रभाव, छवि और सम्मान।
✔ पद, अधिकार और उन्नति
कितनी तेजी से आप ऊँचाइयाँ छूते हैं।
✔ कर्म और निर्णय क्षमता
आप कठिनाइयों का सामना कैसे करते हैं।
2. दशम भाव का स्वामी (10th Lord)
दशम भाव का स्वामी आपका मुख्य करियर निर्देशक होता है।
अगर दशमेश शुभ और बलवान हो, व्यक्ति अपने क्षेत्र में ऊँचा पद प्राप्त करता है।
यदि अशुभ या कमजोर हो तो करियर में उतार-चढ़ाव या दिशा भ्रम देखा जाता है।
दशमेश से ही तय होता है कि—
- सफलता कब मिलेगी
- किस क्षेत्र में स्थिरता बनेगी
- नौकरी बेहतर या व्यवसाय
3. दशम भाव में ग्रहों का प्रभाव
☉ सूर्य
नेतृत्व, प्रशासन, सरकारी नौकरी, प्रसिद्धि।
☾ चंद्र
शिक्षा, सेवा, काउंसलिंग, पब्लिक रिलेशन।
♂ मंगल
पुलिस, सेना, इंजीनियरिंग, तकनीकी कार्य।
☿ बुध
व्यापार, लेखन, पत्रकारिता, शिक्षा, ज्योतिष।
♃ बृहस्पति
शिक्षक, कानून, सलाहकार, प्रशासन, वित्त।
♀ शुक्र
कला, फैशन, फिल्म, सौंदर्य, डिज़ाइन।
♄ शनि
मेहनत, प्रबंधन, उद्योग, सरकारी सेवाएँ।
☊ राहु
टेक्नोलॉजी, विदेश, मीडिया, राजनीति।
☋ केतु
गूढ़ विद्या, शोध, आध्यात्मिक कार्य।
4. दशम भाव के प्रमुख योग
- धर्म-कर्माध्यक्ष योग — भाग्य + कर्म = बड़ी सफलता
- गजकेसरी योग — लोकप्रियता, सम्मान
- बुद्धादित्य योग — बुद्धि, प्रशासन
- विपरीत राजयोग — संघर्ष के बाद उच्च पद
- लक्ष्मी योग — धन-संपन्नता और प्रतिष्ठा
5. दशम भाव से करियर का चयन
कैरियर इन तीन आधारों से स्पष्ट होता है:
✔ 1. दशम भाव की राशि
राशि कार्य का स्वभाव बताती है—
मेष → नेतृत्व
कर्क → सेवा
तुला → कला
मकर → प्रशासन आदि।
✔ 2. दशमेश किस भाव में स्थित है
- 7वें में → व्यापार
- 11वें में → बड़ी आय
- 5वें में → शिक्षा, रचनात्मक कार्य
✔ 3. दशम भाव पर दृष्टि
जिस ग्रह की दृष्टि पड़े, वही गुण करियर में जुड़ता है।
निष्कर्ष
दशम भाव केवल सफलता ही नहीं, बल्कि आपके कर्म, महत्वाकांक्षा और सामाजिक सम्मान का प्रतीक है।
यह भाव बताता है कि व्यक्ति—
- किस दिशा में आगे बढ़ेगा
- किस प्रकार पहचान बनाएगा
- किस उम्र में सफलता प्राप्त करेगा
- उसका करियर कितना स्थिर रहेगा
दशम भाव मजबूत होने पर व्यक्ति जीवन में निश्चित ही आदर, पद और उपलब्धियाँ प्राप्त करता है।
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किसी भी प्रकार की कुंडली, करियर, विवाह, स्वास्थ्य, पितृदोष, वास्तु या ज्योतिष संबंधी सलाह के लिए संपर्क करें:
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शनिवार, 13 दिसंबर 2025
मूलांक 7 का आध्यात्मिक विश्लेषण
शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025
हस्तरेखा में छिपा है आपके जीवन का वर्तमान और भविष्य
गुरुवार, 11 दिसंबर 2025
प्रेम सौंदर्य रिश्तो को निभाने वाले और पति को भाग्यशाली बनाने वाली मूलांक छे वाली लड़कियां।
**मूलांक 6 — प्रेम, सौंदर्य और सामंजस्य के धनी
(आध्यात्मिक विश्लेषण)
लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष, वास्तु एवं क्रिएटिव राइटर**
जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की तारीख— 6, 15 या 24 को होता है, उनका मूलांक 6 माना जाता है। इस अंक का स्वामी है शुक्र ग्रह, जो प्रेम, आकर्षण, कला, सौंदर्य, जीवन-सुख, समर्पण और संबंधों में मधुरता का प्रतीक है।
मूलांक 6 को "लाइफ हार्मोनाइज़र" भी कहा जाता है— क्योंकि ये जहां भी जाते हैं, वहां प्रेम, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा स्वतः निर्मित हो जाती है।
✨ मूलांक 6 के लोग पार्टनर के लिए क्यों लकी माने जाते हैं?
1. भावनात्मक सुरक्षा देते हैं
मूलांक 6 का सबसे बड़ा गुण उनका हार्ट-सेंटरड नेचर है।
इनके साथ रहने पर पार्टनर को हमेशा मिलता है—
- भावनात्मक सहारा
- स्थिरता
- समझ
- अपनापन
ये लोग प्यार केवल शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार से देते हैं।
2. रिश्तों को टूटने नहीं देते
इनके स्वभाव में संबंध जोड़ना और संभालना होता है।
रिश्ते में समस्याएँ आएं तो इन्हें दोष देने की बजाय समाधान खोजने की आदत होती है।
इसी कारण इनके साथ रिश्ते लंबे, सुरक्षित और स्थायी बनते हैं।
3. आकर्षण और सौंदर्य का वरदान
शुक्र की कृपा से ये लोग—
- आकर्षक व्यक्तित्व
- स्वच्छता
- अच्छी पसंद
- सुंदर रहन-सहन
- कलात्मक सोच
- मनमोहक व्यवहार
रखते हैं।
इन सबके कारण पार्टनर को इनसे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दोनों स्तर पर संतुष्टि मिलती है।
4. पैसों और सुख-सुविधाओं में प्रगति करवाते हैं
जहां मूलांक 6 जाता है, वहां—
- आर्थिक स्थिरता
- घर में सुख-सुविधाएं
- सुंदरता
- प्रकाश
- सामंजस्य
आना स्वाभाविक है।
इनके साथ रहने से पार्टनर के जीवन में आर्थिक प्रगति और मानसिक शांति दोनों बढ़ती हैं।
5. रिश्ते में सम्मान और समानता
ये पार्टनर को
- बराबर का सम्मान
- स्वतंत्रता
- आदर
- अपनी राय रखने का अधिकार
देते हैं।
इस कारण इनके रिश्तों में विश्वास और गहरा प्रेम होता है।
6. रोमांटिक और भावुक स्वभाव
इनका प्रेम–व्यवहार बहुत स्नेही और गहरा होता है।
ये छोटी-छोटी बातों में भी प्यार व्यक्त करते हैं—
- सरप्राइज़
- देखभाल
- गिफ्ट्स
- समय देना
- सुंदरता और सौहार्द बनाए रखना
इसीलिए इनके पार्टनर को लगता है कि उन्हें सच्चा प्रेम और समर्पण मिला है।
7. आध्यात्मिक रूप से प्रेम को ईश्वर मानते हैं
मूलांक 6 प्रेम को केवल भावना नहीं, बल्कि एक दिव्य ऊर्जा मानते हैं।
इनके लिए—
“जहां प्रेम है, वहीं परमात्मा है।”
इस आध्यात्मिक दृष्टिकोण के कारण ये अपने पार्टनर के जीवन में
- प्रकाश
- सकारात्मकता
- शांति
- करुणा
भरते हैं।
✨ संक्षेप में: क्यों मूलांक 6 पार्टनर के लिए Lucky होते हैं?
| विशेष गुण | पार्टनर को क्या लाभ मिलता है |
|---|---|
| प्रेम व संवेदनशीलता | भावनात्मक सुरक्षा |
| सौंदर्य व आकर्षण | दिल और मन दोनों खुश |
| समझदारी व संतुलन | रिश्ते स्थायी बनते हैं |
| शुक्र का प्रभाव | आर्थिक उन्नति |
| स्नेह व रोमांस | प्यार भरा रिश्ता |
| आध्यात्मिक प्रेम | मानसिक शांति |
इसलिए मूलांक 6 को प्रेम, विवाह और संबंधों का सर्वश्रेष्ठ अंक माना गया है।
**✍️ लेख
आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
क्रिएटिव राइटर**
मंगलवार, 9 दिसंबर 2025
पार्टनर के लिए लकी साबित होते हैं इस मूलांक के लोग।
🌸 मूलांक 6 — प्रेम, समर्पण और सौंदर्य का प्रतिरूप
✍️ लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष, अंकज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ – इंदौर
Creative Writer | Spiritual Coach
🔷 मूलांक 6 किसे कहते हैं?
जिन व्यक्तियों का जन्म 6, 15, 24 तारीख को होता है उनका मूलांक 6 माना जाता है।
(15 → 1+5 = 6, 24 → 2+4 = 6)
मूलांक 6 का स्वामी शुक्र ग्रह (Venus) है, जो प्रेम, करुणा, सौंदर्य, कला, जीवन-सुख, संबंधों की मधुरता और आध्यात्मिक प्रेम का कारक है।
💖 मूलांक 6 वाले — पार्टनर के लिए सबसे लकी क्यों होते हैं?
शुक्र स्वभाव से ही प्रेम, आकर्षण, कोमलता और सौंदर्य का कारक माना गया है।
मूलांक 6 वालों में यह ऊर्जा जन्मजात रूप से विद्यमान रहती है।
यही कारण है कि ये लोग अपने जीवनसाथी या पार्टनर के लिए बहुत शुभ, सौभाग्यदायक और जीवन-संतुलन देने वाले माने जाते हैं।
नीचे मूलांक 6 के वे खास गुण हैं जो इन्हें “परफेक्ट पार्टनर” बनाते हैं —
🌟 1. गहरी भावनात्मक समझ
मूलांक 6 के लोग दिल से जुड़े होते हैं।
वे अपने पार्टनर की भावना, दर्द, आवश्यकता, मनोदशा और संघर्ष को बिना कहे समझ लेते हैं।
इनके लिए प्रेम सिर्फ एक भावना नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक ज़िम्मेदारी है।
वे अपने साथी के सुख-दुख में समान रूप से जुड़े रहते हैं।
🌟 2. समर्पण और निष्ठा का अद्भुत भाव
यह लोग किसी रिश्ते में पड़ते ही उसे पूरा जीवन देने की भावना रखते हैं।
इनमें स्थिरता, वफादारी और गहराई होती है।
इनका प्रेम “क्षणिक आकर्षण” नहीं होता, यह सच्चा—धीमे लेकिन गहरे पानी जैसा होता है।
🌟 3. घर और रिश्तों में सुख, शांति और सुंदरता लाने वाले
शुक्र का आशीर्वाद इन लोगों को स्वच्छता, सजावट, सौंदर्य और सामंजस्य की ओर प्रेरित करता है।
इनकी उपस्थिति से घर में—
✔ प्रेम बढ़ता है
✔ तकरार कम होती है
✔ धन का प्रवाह सुधरता है
✔ कला-संगीत का माहौल बनता है
इनके आने से घर में एक अनोखी “सकारात्मक आभा” महसूस होती है।
🌟 4. पार्टनर के लिए शुभ—भाग्य बढ़ाने वाले
ज्योतिषीय रूप से शुक्र जब शुभ स्थिति में आता है तो व्यक्ति का—
- आकर्षण बढ़ता है
- संबंध मजबूत होते हैं
- धन-सुख मिलता है
- मानसिक प्रसन्नता रहती है
मूलांक 6 वाले अपने प्रेमी/प्रेमिका या जीवनसाथी में ये सब सकारात्मक परिणाम पैदा करते हैं।
अंकज्योतिष में इसे “भाग्य-वर्धक असर” कहा जाता है।
🌟 5. संघर्ष में ढाल, सफलता में साथ
अधिकतर लोग बुरे समय में बदल जाते हैं लेकिन मूलांक 6 वाले कठिन परिस्थितियों में और भी अधिक मजबूत हो जाते हैं।
वे अपने साथी को मानसिक, भावनात्मक और व्यावहारिक सभी स्तर पर संभालते हैं।
उनमें "Healing Energy" होती है —
जो साथी के तनाव को कम करती है और उसे नई ऊर्जा देती है।
🌟 6. प्यार को आध्यात्मिक स्तर तक ले जाने की क्षमता
मूलांक 6 वालों का प्रेम सिर्फ रोमांस नहीं होता —
वह “आत्मिक संबंध” को भी समझते हैं।
ऐसे लोग अपने पार्टनर को:
- आध्यात्मिक रूप से प्रेरित करते हैं
- जीवन का सही उद्देश्य समझाते हैं
- भीतर की शांति पाने में मदद करते हैं
इस कारण यह अपने साथी के जीवन में प्रकाश और दिशा दोनों प्रदान करते हैं।
🌺 मूलांक 6 की विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा
शुक्र ग्रह “भक्ति, दया और सौंदर्य” का सृष्टि-तत्व है।
मूलांक 6 वालों को—
🌷 प्रेम देना आता है
🌷 प्रेम निभाना आता है
🌷 प्रेम से जीवन बदलना आता है
इनका जीवन-दर्शन:
“प्रेम ही सबसे बड़ा धर्म है।”
🎀 मूलांक 6 वाले का पार्टनर कैसा होना चाहिए?
इनके लिए सबसे उपयुक्त:
✔ मूलांक 2
✔ मूलांक 3
✔ मूलांक 6
✔ मूलांक 9
ये संयोजन जीवन में सामंजस्य और स्थायी सुख लाते हैं।
🌈 मूलांक 6 के लिए विशेष उपाय (शुक्र को मजबूत करने हेतु)
- सुगंध/इत्र का उपयोग
- सफेद या गुलाबी वस्त्र
- शुक्रवार का व्रत
- राधा-कृष्ण की उपासना
- कमरे में ताज़े फूल रखना
- मधुर वाणी का अभ्यास
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आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ – इंदौर
Creative Writer | Vedic Numerology Expert
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घर में डस्टबिन रखने की सही दिशा
शब्दों का मायाजाल एक आध्यात्मिक कहानी
चांदी का छल्ला पहनने के लाभ आईए जानते हैं।
कुंडली में राहु बुध योग और आपकी तर्कशक्ति
आपका कैरियर और कुंडली का दशम भाव
— आलेख : आलोक रंजन त्रिपाठी
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ, इन्दौर
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दशम भाव क्या है?
जन्म कुंडली में दशम भाव (10th House) को कर्म, प्रतिष्ठा, पद और करियर का प्रमुख स्थान माना जाता है।
इसी भाव से पता चलता है कि व्यक्ति किस पेशे में आगे बढ़ेगा, समाज उसे किस रूप में पहचानेगा और उसकी जीवन-दिशा कैसी बनेगी।
दशम भाव केवल नौकरी या व्यापार नहीं बताता, बल्कि यह पूरी कर्म यात्रा और जीवन की उपलब्धियों का आधार है।
1. दशम भाव आपकी करियर दिशा कैसे तय करता है?
✔ करियर का मार्ग
कौन सा पेशा आपको स्थिरता और सफलता देगा।
✔ सामाजिक पहचान
समाज में आपका प्रभाव, छवि और सम्मान।
✔ पद, अधिकार और उन्नति
कितनी तेजी से आप ऊँचाइयाँ छूते हैं।
✔ कर्म और निर्णय क्षमता
आप कठिनाइयों का सामना कैसे करते हैं।
2. दशम भाव का स्वामी (10th Lord)
दशम भाव का स्वामी आपका मुख्य करियर निर्देशक होता है।
अगर दशमेश शुभ और बलवान हो, व्यक्ति अपने क्षेत्र में ऊँचा पद प्राप्त करता है।
यदि अशुभ या कमजोर हो तो करियर में उतार-चढ़ाव या दिशा भ्रम देखा जाता है।
दशमेश से ही तय होता है कि—
- सफलता कब मिलेगी
- किस क्षेत्र में स्थिरता बनेगी
- नौकरी बेहतर या व्यवसाय
3. दशम भाव में ग्रहों का प्रभाव
☉ सूर्य
नेतृत्व, प्रशासन, सरकारी नौकरी, प्रसिद्धि।
☾ चंद्र
शिक्षा, सेवा, काउंसलिंग, पब्लिक रिलेशन।
♂ मंगल
पुलिस, सेना, इंजीनियरिंग, तकनीकी कार्य।
☿ बुध
व्यापार, लेखन, पत्रकारिता, शिक्षा, ज्योतिष।
♃ बृहस्पति
शिक्षक, कानून, सलाहकार, प्रशासन, वित्त।
♀ शुक्र
कला, फैशन, फिल्म, सौंदर्य, डिज़ाइन।
♄ शनि
मेहनत, प्रबंधन, उद्योग, सरकारी सेवाएँ।
☊ राहु
टेक्नोलॉजी, विदेश, मीडिया, राजनीति।
☋ केतु
गूढ़ विद्या, शोध, आध्यात्मिक कार्य।
4. दशम भाव के प्रमुख योग
- धर्म-कर्माध्यक्ष योग — भाग्य + कर्म = बड़ी सफलता
- गजकेसरी योग — लोकप्रियता, सम्मान
- बुद्धादित्य योग — बुद्धि, प्रशासन
- विपरीत राजयोग — संघर्ष के बाद उच्च पद
- लक्ष्मी योग — धन-संपन्नता और प्रतिष्ठा
5. दशम भाव से करियर का चयन
कैरियर इन तीन आधारों से स्पष्ट होता है:
✔ 1. दशम भाव की राशि
राशि कार्य का स्वभाव बताती है—
मेष → नेतृत्व
कर्क → सेवा
तुला → कला
मकर → प्रशासन आदि।
✔ 2. दशमेश किस भाव में स्थित है
- 7वें में → व्यापार
- 11वें में → बड़ी आय
- 5वें में → शिक्षा, रचनात्मक कार्य
✔ 3. दशम भाव पर दृष्टि
जिस ग्रह की दृष्टि पड़े, वही गुण करियर में जुड़ता है।
निष्कर्ष
दशम भाव केवल सफलता ही नहीं, बल्कि आपके कर्म, महत्वाकांक्षा और सामाजिक सम्मान का प्रतीक है।
यह भाव बताता है कि व्यक्ति—
- किस दिशा में आगे बढ़ेगा
- किस प्रकार पहचान बनाएगा
- किस उम्र में सफलता प्राप्त करेगा
- उसका करियर कितना स्थिर रहेगा
दशम भाव मजबूत होने पर व्यक्ति जीवन में निश्चित ही आदर, पद और उपलब्धियाँ प्राप्त करता है।
🔶 अंतिम नोट (आपके निर्देश अनुसार)
किसी भी प्रकार की कुंडली, करियर, विवाह, स्वास्थ्य, पितृदोष, वास्तु या ज्योतिष संबंधी सलाह के लिए संपर्क करें:
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सनातन की धरती भारतवर्ष
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