ग़ज़ल। अपना नहीं जो उसको अपना बनाऊं क्यों लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ग़ज़ल। अपना नहीं जो उसको अपना बनाऊं क्यों लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

अपना नहीं जो उसको अपना बनाऊं क्यों

 अपना नहीं जो उसको अपना बनाऊं क्यूं। मैं मस्त कलंदर हूं ये ज़हमत उठाऊं क्यूं।। 😊👍💫
इंसान की फितरत में है कहकर के मुकरना। नाराज़गी का इल्म भी उसको कराऊं क्यूं।। 😢👎💔
बेसाख्ता वो आए भी आकर चले गए। अब ऐसे दोस्त यार को दिल में बसाऊं क्यूं।। 😔😢🚫
तारीख़ की गिनती में हर इक हादसा यहां। मैं दर्द दास्तां को बारहा सुनाऊं क्यूं।। 📚💫🕰️
नफ़रत की ये चिंगारियां सबको जला रही। मैं मज़हबों के बीच में खाई बनाऊं क्यूं।। 🌎💖🕊️

आलोक रंजन त्रिपाठी 🌟👏💕

प्राचीन कवियों को राजहंस से इतना लगाव क्यों था

प्राचीन कवियों को राजहंस से इतना लगाव क्यों था? प्राचीन कवियों को राजहंस में एक साथ तीन बातें मिलती थीं, जो किसी और पक्षी में नहीं मिलती थीं...