शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

माता-पिता का सम्मान उपकार चुकाना नहीं, उनके प्रेम के प्रति कृतज्ञ होना है

# लघुकथा : **कर्तव्य नहीं, कृतज्ञता**

**लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी**

राघव के माता-पिता ने अपना पूरा जीवन उसकी परवरिश में लगा दिया था। पिता ने अपनी इच्छाओं को सीमित रखा और माँ ने अपनी खुशियों को बच्चों की मुस्कान में तलाशा। उनकी आँखों में बस एक ही सपना था—बेटा अच्छा इंसान बने।

समय बीता। राघव पढ़-लिखकर एक प्रतिष्ठित पद पर पहुँच गया। विवाह हुआ, बच्चे हुए और जीवन सुख-सुविधाओं से भर गया। लेकिन उसने अपने माता-पिता को कभी अपनी व्यस्तताओं के बीच अकेला नहीं छोड़ा।

एक दिन मित्र ने उससे पूछा, “तुम अपने माता-पिता की इतनी सेवा क्यों करते हो? आखिर उन्होंने तुम्हें जन्म दिया, पाला-पोसा। यह तो उनका कर्तव्य था। अब तुम अपना कर्तव्य निभा रहे हो।”

राघव मुस्कुराया और बोला, “मित्र, यह सच है कि उन्होंने मुझे पालकर अपना कर्तव्य निभाया, लेकिन उन्होंने मेरे लिए जो त्याग किया, वह किसी कर्तव्य की सीमा में नहीं बँध सकता। पिता ने मेरी किताबों के लिए अपनी इच्छाएँ बेचीं और माँ ने मेरी मुस्कान के लिए अपने आँसू छिपाए। उन्होंने मुझे केवल जीवन नहीं दिया, जीवन जीने का संस्कार भी दिया।”

कुछ क्षण रुककर उसने कहा, “मैं उनकी सेवा इसलिए नहीं करता कि वे मेरे माता-पिता हैं, बल्कि इसलिए करता हूँ कि उनके त्याग ने मुझे इस योग्य बनाया है कि मैं किसी का सहारा बन सकूँ।”

उसी शाम राघव घर लौटा। माँ बरामदे में बैठी उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। उसने माँ के चरण स्पर्श किए और पिता के पास बैठकर उनके दिनभर के अनुभव सुनने लगा।

पिता ने स्नेह से उसके सिर पर हाथ रखा। उनकी आँखों में संतोष था—उनका बेटा केवल सफल नहीं हुआ था, संवेदनशील भी बना था।

**सच्चा संस्कार वही है, जिसमें संतान माता-पिता की सेवा को बोझ या विवशता नहीं, बल्कि उनके त्याग के प्रति कृतज्ञता का अवसर समझे।**

क्योंकि माता-पिता का सम्मान केवल उनके चरण छूने में नहीं, बल्कि उनके स्वाभिमान, भावनाओं और अनुभवों को आदर देने में है।

**— आलोक रंजन त्रिपाठी**
*ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ, इन्दौर | साहित्यकार*

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 “कर्तव्य नहीं, कृतज्ञता: माता-पिता के सम्मान की सच्ची कहानी”।


माता-पिता का सम्मान उपकार चुकाना नहीं, उनके प्रेम के प्रति कृतज्ञ होना है

# लघुकथा : **कर्तव्य नहीं, कृतज्ञता** **लेखक: आलोक रंजन त्रिपाठी** राघव के माता-पिता ने अपना पूरा जीवन उसकी परवरिश में लगा दिया ...